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दुधवा राष्ट्रीय उद्यान में गैंडा पुनर्वास

 

बदुधवा राष्ट्रीय उद्यान में गैंडा पुनर्वास परियोजना फेज 2 में 4 गैंडों को मिला नया आशियाना

फारूक हुसैन

34 साल बाद महावीर ने रचा इतिहास

पलियाकलां-खीरी गैंडा पुनर्वास परियोजना अभियान के तहत सोमवार से लगी टीम को गैंडों को उनके नये घर (फेज-2) में पहुँचाये जाने के चल रहे शिफ्टिंग अभियान के पांचवे दिन की सुबह टीम ने फील्ड डायरेक्टर के दिशा निर्देशन में लोकेटर टीम ने चिन्हित चौथे गैंडे को ट्रैंकुलाइज कर नए घर मे पहुँचाने सफलता हासिल कर ली। अंतिम गैंडे को विस्थापित करने के साथ ही अभियान के समापन के साथ ही दुधवा के इतिहास में उपनिदेशक महावीर कौजलगी का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाना भी निश्चित हो गया है।
बताते चलें दुधवा नेशनल पार्क में चल रही गैंडा पुनर्वास परियोजना के अंर्तगत फेज-1 से चार गैंडों को फेज-2 में शफ्टिंग किये जाने का अभियान को आसाम से पहुंचे विशेषज्ञों के साथ अधिकारियों व कर्मचारियों की मौजूदगी में शुरु किया गया था। सोमवार को अभियान के पहले दिन टीम ने काफी मशक्कत के बाद एक नर मादा गैंडे को ट्रैंकुलाइज करके फेज-2 में पहुंचा था। जिसके बाद दूसरे दिन के अभियान में टीम को बड़ी सफलता हाथ लगी और टीम ने दो और गैंडों को ट्रैंकुलाइज करके उन्हें नये घर तक पहुंचा दिया। दो दिनों के शिफ्टिंग अभियान में टीम को चार में से कुल तीन गैंडे मिल चुके थे जिसमें दो मादा व एक नर गैंडा शामिल था। तीन गैंडों को दो दिनों में ट्रैंकुलाइज कर नये घर में पहुंचाने के बाद चौथे व अंतिम दिन गैंडे को टैंकुलाइज करने निकली टीम पूरे दिन कड़ी मेहनत के बावजूद चिन्हित गैंडे को लोकेट नही कर सकी, और उन्हें एक दिन का अभियान और बढ़ाना पड़ा। शुक्रवार की सुबह फील्ड डायरेक्टर सुनील चौधरी के दिशा निर्देशन में लोकेटर टीम में शामिल डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के  रोहित रवि, अविनाश हाथियों पर सवार होकर गैंडे को लोकेट करने के लिये निकल पड़े। कुछ समय बाद भी लोकेटर टीम ने चौथे मादा गैंडे को लोकेट कर लिया। गैंडे के लोकेट होती ही ट्रैंकुलाइज टीम के डा.भाष्कर चौधरी व सौरभ सिंघई ने उसे डार्ट मारी जिसके बाद गैंडा बेहोश हो गया। बेहोश होते ही टीम ने उसकी ऑखों व कानों को कपड़े से ढक दिया और उसे वाहन में लादकर सफलता पूर्वक फेज-2 में पहुंचा दिया। चौथे गैंडे को ट्रैंकुलाइज करने के साथ ही उसे नये घर पहुंचाने के बाद टीम ने राहत की सांस ली।

परियोजना के महारथी

फेज 2 परियोजना में शुरु हुए चार गैंडों के शिफ्टिंग अभियान में एफडी सुनील चौधरी, दुधवा के डीडी महावीर कौजलगि, उप निदेशक बफर जोन के अनिल पटेल, डा. केके शर्मा, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के ट्रैंकुलाइज विशेषज्ञ डा. परीक्षित, डा. मुदिक गुप्ता, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ आसाम के रइनो कोआर्डीनेटर अमित शर्मा, दबीर हसन, डब्ल्यूटीआई की डा. रीतिका, डा. अभिषेक, बायोलाजिस्ट आशीष विष्टा, रोहित रवि व फजर्लुरहमान ने कार्य को अंजाम तक पहुंचाया।

– निगरानी में लगीं हाथी सवार टीमें

बेलरायां रेंज के भादीताल में स्थापित की गई गैंड पुनर्वास फेज 2 परियोजना में पहुंचाये गये तीन मादा व एक नर गैंडों की बराबर एक साल तक निगरानी का कार्य चलेगा। गैंडों की निगरानी की जिम्मेदारी एफडी के नेतृत्व में डब्ल्यूडब्ल्यू की टीम दो हाथियों के सहारे करेगी। अगर किसी कारण वश गैंडे दूर निकल गये तो उन पर ड्रोम कैमरों से नजर रखी जायेगी।


9 हांथियों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका-
पूरे अभियान को सफल बनाने में दुधवा के 9 हांथियो बटालिक, मधु, मोहन, पाखरी, रूपकली, सुंदरा, पवनकली, गजराज, चमेली सुलोचना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नवीन प्रोजेक्ट-
निकट भविष्य में सम्पन्न होने वाले कार्यक्रम की जानकारी देते हुये फील्ड डायरेक्टर सुनील चौधरी व उपनिदेशक महावीर कौजलगी ने बताया कि जल्दी ही लगभग ग्यारह नर व मादा हाथियों को कर्नाटक से दुधवा पार्क लाया जायेगा जो तीन चार साल की कड़ी देखरेख व प्रशिक्षण के बाद पर्यटको के लिये भी सुलभ हो

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